राब बीमारियों की एक उत्तम औषिधि भी है

14 अगस्त 2018   |  रवि मेहता   (70 बार पढ़ा जा चुका है)

राब बीमारियों की एक उत्तम औषिधि भी है

राब (Raab) एक आसान सस्ता तथा शक्तिशाली टॉनिक (Tonic) समान आहार है राब इंस्टेंट एनर्जी देने वाला खाद्य पदार्थ है गाय के घी से बनने की वजह से राब पचने में हल्की है आयुर्वेद की दृष्टि से बहुत सारे रोगों में लाभ यह उत्तम अन्ना औषधि है राब यह कोई भी उम्र के किसी भी व्यक्ति को बीमारी या बगैर बीमारी के भी सेवन करना उत्तम माना गया है आयुर्वेद में राब को त्रिदोष शामक कहां है लेकिन राब खास करके वायु का श्रेष्ठतम शमन करने वाली औषधि है-

विविध प्रकार से राब (Raab) बना सकते हैं लेकिन गेहूं के आटे की राब बेहद प्रचलित है इसमें सबसे पहले गेहूं का आटा गाय के घी में हल्का गुलाबी होने तक भुना जाता है उसके बाद आटे से 8 गुना पानी डालकर उसे धीमी आंच पर उबालते हैं इसके बाद इसमें स्वाद अनुसार गुड डाला जाता है जब राब पकाई जाती है वह थोड़ी गाड़ी हो जाती है तब उसमें थोड़ी लौंग, दालचीनी, इलायची तथा अपने पसंदीदा सूखे मेवे भी डाले जाते हैं राब पानी या दूध से भी बनाई जाती है राब थकान कम करने वाली तथा अशक्त लोगों को शक्ति (Energy) प्रदान करने वाली है-


लाभदायक प्रयोग-


जिन्हें इम्यूनिटी (Imunity) कम हो या हमेशा सर्दी रहती हो या फिर भूख ठीक से ना लगती हो, अच्छे से नींद ना आती हो, ब्लड प्रेशर निम्न रहता हो तो ऐसे लोगों ने राब में थोड़ी मात्रा में सोंठ, पीपली मूल तथा अजवाइन डालकर सेवन करना चाहिए-

जिनको अपचन, मंदाग्नि तथा पाचन संबंधित रोग होते हैं ऐसे लोगों ने थोड़ी पतली राब पीनी चाहिए-

राब सर्दियों में उत्तम शक्तिवर्धक तथा पोष्टिक खाद्य पदार्थ है गेहूं के आटे के साथ साथ बाजरा, राजगिरा जैसे आटे की भी राब बनाई जाती है-

बाजरे की राब छोटे बच्चों के लिए बेहद पौष्टिक (Nutritional) उत्तम आहार है शिशु को जब दांत आते हो या छाती में कफ भर गया हो ऐसी समस्या में राब को उबालते समय उसमें थोड़ा अजवाइन कूट कर डाले तथा गुड डालने से यह राब की पौष्टिकता बढ़ जाती है तथा कफ संबंधित समस्याएं दूर होती हैं-

प्रसूता के लिए राब बेहद उपयोगी है पुराने जमाने से ही डिलीवरी (Delivery) के बाद स्त्री को शारीरिक शक्ति के लिए तथा अन्य समस्याओं को दूर करने के लिए राब पिलाई जाती थी आजकल वजन बढ़ने के डर से लोग राब पीने से डरते हैं जिससे उनको फायदा होने की वजह नुकसान ही होता है-

प्रसूता के लिए राब बनाने के लिए गेहूं का आटा लेकर उसमें बबूल का गोंद मिलाएं तथा उसे घी में भून ले इसके बाद उसमें गुड़ का पानी डालें और खूब फेटे जब राब उबलने लगे तब उसमें सोंठ,पीपली मूल, इलायची तथा सूखे हुए नारियल के टुकड़े डालें और यह राब प्रसूता को पीने को दें इसे पीने से डिलीवरी (Child birth) के बाद का कमर दर्द तथा वायु से होने वाले तमाम लोगों में राहत मिलती है-

आमवात के लिए पिपली मूल की राब बेहद उपयोगी है पीपली मुल की राब बनाने के लिए गुड़ (Jaggery) का पानी उबालिए इसमें आधे से एक चम्मच पीपली मूल का पाउडर डालें 2-3 उबाल आने पर इसे उतार ले तथा इसमें एक चम्मच गाय का घी मिलाकर पिए इस प्रयोग से शरीर में संचित आम दोष दूर होते हैं ब्लड प्रेशर संतुलित रहता है इस राब में गेहूं का आटा या पानी की जगह दूध भी मिला सकते हैं गरम घी में 2 चम्मच गेहूं का आटा उनके उसमें शक्कर मिलाकर दूध डालें तथा उबालें यह राब सर्दियों में बेहद उपयोगी है इसे नियमित लेने से आमवात, कफ, सर्दी, बदन दर्द तथा अशक्तिजीर्ण ज्वर जैसी समस्याओं में लाभ होता है-

अलवी के बीज को घी में भूनकर बनाई हुई राम पीने से प्रसूति जल्दी होती है यह पीने से हिचकी या हिक्का रोग भी शांत होता है प्रसूति के बाद यह राब पीने से स्तनों में दूध बढ़ता है पाचन क्षमता बढ़ती है भूख लगती है तथा कमर दर्द वह पैरों के दर्द में राहत मिलती है-

जौ की राब सुबह नाश्ते में प्रतिदिन पीने से पेट तथा आंतों के रोगों में बेहद फायदा होता है पेट व आंतों के छाले दूर होते हैं हाल ही में हुए संशोधन के मुताबिक रोगी अगर 3 महीने जौ की राब पिए तो अल्सर छाले ठीक हो जाते हैं तथा छोटी व बड़ी आंत संपूर्ण तरीके से स्वस्थ होकर पाचन संबंधी तथा आंतों संबंधित सारी समस्याएं दूर होती है-


राब बीमारियों की एक उत्तम औषिधि भी है


कुल्थी के आटे की राब पीने से बवासीर, मस्से तथा भगंदर की समस्या मिटती है-

पुनर्नवा, हल्दी, सोंठ, हरड़, दारू हल्दी, गिलोय, चित्रक मूल, देवदार, तथा भारंगी, समभाग लेकर इसकी राब बनाकर पीने से भगंदर में बहुत आराम मिलता है-

गले में दर्द, सर्दी, कफ, सिर दर्द, छाती में दर्द, जीर्ण ज्वर, टॉन्सिल्स, थ्रोट इंफेक्शन, गले में खराश, रोगप्रतिकारक शक्ति की कमी जैसी तकलीफे तथा सर्दी या बारिश के मौसम में बार-बार बीमार पड़ना जैसी तकलीफ़ो में उत्तम औषधि तथा रोकथाम के तौर पर राब पीने से शरीर की रोग प्रतिकारक शक्ति को मजबूत किया जा सकता है जिससे सीजनल चेंजेस या ऋतूमान में आए हुए बदलाव की वजह से होने वाली बीमारियों से बचा जा सकता है-

यह राब बनाने के लिए चार लौंग, दो काली मिर्च ,एक इंच दालचीनी का टुकड़ा, एक इंच अदरक का टुकड़ा, पांच-छ तुलसी पत्ते, एक चम्मच शहद तथा दो कप पानी ले-



विधि-


एक बर्तन में लौंग, काली मिर्च, दालचीनी, अदरक तथा तुलसी के पत्ते डाल कर दो कप पानी डालकर आधा होने तक उबालें जब आधा हो जाए तब उसे छानकर उसमें शहद मिला ले इसमें हो सके तो एक चम्मच भुने हुए गेहूं का या बाजरे का आटा भी मिला सकते हैं अगर आटा मिलाना हो तो आटे को समभाग घी में भूनकर उपरोक्त काढे में उबालें तथा इसे गरम-गरम पिए यह राब सीजनल बीमारियों की उत्तम दवा है-


http://www.upcharaurprayog.com/2018/08/Raab-is-a-great-medicine.html



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डॉ.स्नेहा दुबे
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