गेहूं की रोटी जहर के समान | Wheat Roti Poison In Hindi

26 अप्रैल 2019   |  डॉ मुकुल पांडेय   (628 बार पढ़ा जा चुका है)

गेहूं की रोटी जहर के समान | Wheat Roti Poison In Hindi

क्या आपको पता है कि गेहूं की रोटी जहर के समान है? शायद नहीं तो चलिए आज हम इस लेख के माध्यम से आपको गेहूं में मौजूद ग्लूटेन प्रोटीन के बारें में बताएंगे जो शरीर में किसी जहर के समान ही कार्य करता है। अब आपको लग रहा होगा कि हमारे पूर्वजों से ही हम गेहूं की रोटी का सेवन करते चले आ रहे है तो आज आखिर ऐसा क्या हो गया जो यह जहर के समान हो गया। दरअसल आपको बता दे कि गेहूं में ग्लूटेन नामक एक प्रोटीन पाया जाता है जो सीलिएक रोगियों के लिए काफी खतरनाक माना जाता है। गेहूं तथा जौ में मौजूद यह प्रोटीन इसके आटे को गूधनें पर इसे बांध देता है जिसके जरिए मनुष्य अपनी इच्छा के अनुसार उसका रोटी या पूरी बना लेता है। एक शोध में हुई जानकारी के अनुसार भारत में करीब 10 प्रतिशत लोग इस सीलिएक रोग से ग्रसित है और अगर इस बीमारी का समय से इलाज आरंभ नहीं किया जाए तो हृदय रोग व पेट के कैंसर को भी जन्म दे सकता है। चलिए इस सीलिएक रोग के बारें में विस्तार पूर्वक जानते है-


सीलिएक रोग क्या है? | What Is Celiac Disease In Hindi


सीलिएक रोग एक छोटी आंत की बीमारी होती है और इस रोग के होने पर पीड़ितों को गेहूं, जौ और ओट्स में मौजूद ग्लूटेन नामक प्रोटीन से एलर्जी होता है। ग्लूटेन में कई तरह के तत्व होते है जिनमें से एक ग्लियाडिन भी है इसी के वजह से यह शरीर में खतरनाक प्रभाव उत्पन्न करता है। जब कोई सीलिएक रोग से पीड़ित व्यक्ति ग्लूटेन युक्त पदार्थों का सेवन करता है तो यह परेशानी बहुत अधिक बढ़ जाती है। यह रोग अधिकतर बच्चों में पाया जाता है इससे पीड़ित बच्चों को लगातार दस्त की समस्या, पेट फूलना और बच्चों के विकास में बाधा बनती है।


सीलिएक और ग्लूटेन एलर्जी के लक्षण | Symptoms Of Celiac Disease In Hindi


अगर कोई सीलिएक रोग या ग्लूटेन एलर्जी से पीड़ित है तो उसमें इसके लक्षणों में तेज सिरदर्द, पेट में मरोड़, पेट फूलना और चिंता व अवसाद का होना पाया जाता है। सीलिएक रोग एक वंशानुगत बीमारी है। ग्लूटेन के एलर्जी से त्वचा में जलन, अस्थमा, और महिलाओं में मासिक धर्म चक्र की अनियमित्ताएं होने लगती है। इस बीमारी में पीड़ित रोगियों द्वारा गेहूं की रोटी खाने से अफरा, डायरिया, मतली और कब्ज की समस्या उत्पन्न हो जाती है। हालांकि इस रोग के लक्षण रोगियों को पहचानने में बहुत ही कठिनाई का सामना करना पड़ता है और अगर सही समय से इसका इलाज प्रारंभ नहीं हो तो यह आगे चलकर आंतों के कैंसर का रुप भी धारण कर लेता है।


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सीलिएक रोग का इलाज | Treatment On Celiac Disease In Hindi


अब तक के परीक्षण से यह बात तो साफ हो चुकी है कि यह बीमारी वंशानुगत है जो माता-पिता के द्वारा बच्चों में फैलती है। हालांकि इनके लक्षणों को देखकर इस बात का पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि यह सीलिएक रोग या ग्लूटेन एलर्जी का संकेत है या नहीं। फिर भी डॉक्टर द्वारा रक्त के परीक्षण के उपरांत इस बात का पता लगाया जा सकता है। गठिया और अल्सर जैसे रोगों के होने का कारण भी गेहूं हो सकता है। वर्षो पहले तक यह बीमारी विदेशों की बीमारी मानी जाती थी लेकिन अब भारत में भी प्रवेश कर चुकी है। इस बीमारी का पता लगाने के लिए tTG-IgA एंटीबॉडी सामान्य भाषा में इसे tTG कहा जाता है। यह परीक्षण सीलिएक रोग की जांच करने का बेहतर तरीका है। ब्लड का सैंपल लेने के बाद अगर रिजल्ट पाजिटिव में आता है तो आंतो की स्थिती को दूरबीन से देखा जाता है जिसे एंडोस्कोपी ऑफ टिशू टेस्टिंग कहा जाता है इस रोग परीक्षण की जांच 1000-1500 रुपए तक होती है। परीक्षण के बाद ही डॉक्टर रोगों का इलाज रोगियों के स्थिति के अनुसार शुरुआत कर देते है।


सीलिएक रोग होने पर बचाव | Prevention On Celiac Disease In Hindi


अगर आपको पता चल जाए कि आप ग्लूटेन प्रोटीन से एलर्जी है या सीलिएक रोग से पीड़ित है तो आप गेहूं और ज्वार से बने उत्पादों का सेवन करना बंद कर देना चाहिए। आप गेहूं की रोटी के स्थान पर ग्लूटेन-फ्री आटे की रोटी का सेवन कर सकते है। सीलिएक बीमारी से ग्रस्त लोग चावल या मक्का का सेवन कर सकते है। ओट्स का सेवन भी बहुत संभलकर करना चाहिए आप अपने आहार में बीन्स, ताजे अंडे, फल और हरी सब्जियां शामिल करें। आप दूध से बने पदार्थों का सेवन भी कर सकते है। यही कारण है कि बाजार में ग्लूटेन फ्री आटे की बिक्री शुरु हो चुकी है जिसमें चावल के आटे, आलू के स्टार्च, ग्वार गम, और टैपियोका के स्टार्च को मिलाकर यह तैयार किया जाता है।


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