तुलसी के लाजवाब फायदे और नुकसान

28 मई 2019   |  डॉ.स्नेहा दुबे   (67 बार पढ़ा जा चुका है)

हिंदू धर्म को मानने वाले अपने घर में तुलसी का पौधा जरूर रखते हैं. भारत में तुलसी के पौधे की पूजा की जाती है और तुलसी को मां का नाम देकर देवियों में शुमार किया गया है. वैसे तुलसी एक पौधा जिसका उपयोग आयुर्वेदिक रूप से ज्यादा किया जाता है, बहुत से लोग तुलसी का प्रयोग जड़ी-बूटियां और औषधि बनाने में करते हैं. तुलसी में मिलने वाले गुण बहुत अलग होते हैं जो कई बीमारियों से हमारा बचाव कर सकती है. तुलसी को जड़ी-बूटियों की रानी और जीवन के लिए अमृत कहा जाता है जिसमें कई जरूरी तत्व पाए जाते हैं, मगर इसके कुछ नुकसान भी होते हैं जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माने जाते हैं.


तुलसी के फायदे


तुलसी के पौधों में पाए जाने वाले गुण


वैदिक काल से भारत में तुलसी के पौधे का प्रयोग किया जा रहा है और औषधी के नाम पर तो तुलसी सूजन, रोधी, गठिया, सर्दी-खांसी, लिवर, डायबिटीज और दमा जैसी बीमारियों के लिए रामबाण है. तुलसी में पाए जाने वाले पांच प्रकारों को मिलाकर इनका अर्क निकाला जाए, तो यह पूरी दुनिया की सबसे प्रभावशाली और बेहतरीन दवा बन सकती है. इसमें एंटी-ऑक्सीडेंट, एंटी- बैक्टीरियल, एंटी-वायरल, एंटी-फ्लू, एंटी-बायोटिक, एंटी-इफ्लेमेन्ट्री व एंटी डिजीज के गुण पाए जाते हैं और ये कई तरह की बीमारियों को दूर करने में सहायक होती है. तुलसी लगाने से आस-पास सुंगध फैलती है, यह आंतरिक समस्याएं दूर करती है, सर्दी खंसी से बचाती है, वायु शुद्ध करती है, पाचन संबंधित समस्याओं को हल करती है और ताजगी प्रदान करती है.


तुलसी में क्या तत्व होते हैं ?


वैसे तो तुलसी के पौधे में एक नहीं बल्कि कई तत्व होते हैं लेकिन यहां पर आपको कुछ के बारे में बताऊंगी. एक कप यानी 42 ग्राम तुलसी में प्रोटीन 1.3 ग्राम, पानी 38.7 ग्राम, ऐश 0.6 ग्राम, कुल कैलोरी 9.8, कार्बोहाइड्रेट्स 1.1 ग्राम, कुल फैट 271 मिलीग्राम, कैल्शियम 75 ग्राम, आयरन 1.3 मिलीग्राम, सोडियम 1.7 मिलीग्राम, मैग्नीशियम 27 मिलीग्राम, फॉस्फोरस 24 मिलीग्राम और विटामिन A, C, E, K, B6 पाया जाता है. जिसका उपयोग सही मात्रा में किया जाए तो शरीर के सभी विषाणु बाहर निकल जाएंगे और आप अंदर से अच्छा महसूस करेंगे. तुलसी कितने प्रकार की होती हैं ?

1. श्याम तुलसी,

2. राम तुलसी,

3. श्वेत/विष्णु तुलसी,

4. वन तुलसी,

5. नींबू तुलसी


तुलसी के फायदे


आयुर्वेद में तुलसी के पौधे के हर भाग को स्वास्थ्य से जोड़कर फायदेमंद बताया जाता है. तुलसी की जड़, उसकी शाखाएं, पत्ती और बीज सभी का अपना-अपना महत्व होता है. आमतौर पर घरों में दो तरह की तुलसी देखने को मिलती है, जिसमें एक की पत्त‍ियों का रंग थोड़ा गहरा होता है और दूसरा जिसकी पत्तियों का रंग हल्का होता है. तुलसी के पौधों की बहुत सी ऐसी खासियत हैं जिनके बारे में शायद ही आपने सुना है तो चलिए मैं आपको इनके बारे में बताती हूं.

यौन रोग- पुरुषों में शारीरिक कमजोरी होने पर तुलसी के बीज का इस्तेमाल काफी फायदेमंद होता है. इसके अलावा यौन-दुर्बलता और नपुंसकता में भी इसके बीज का नियमित इस्तेमाल फायदेमंद रहता है.

अनियमित पीरियड्स- अक्सर महिलाओं को पीरियड्स में अनियमितता की शिकायत हो जाती है. ऐसे में तुलसी के बीज का इस्तेमाल करना फायदेमंद होता है. मासिक चक्र की अनियमितता को दूर करने के लिए तुलसी के पत्तों का भी नियमित किया जा सकता है.

सर्दी में खास- अगर आपको सर्दी या फिर हल्का बुखार है तो मिश्री, काली मिर्च और तुलसी के पत्ते को पानी में अच्छी तरह से पकाकर उसका काढ़ा बना लें. ऐसा दिन में कम से कम तीन बार करें इससे फायदा मिलेगा.

दस्त होने पर- अगर कोई दस्त से परेशान है तो उन्हें तुलसी के बारे में बताएं. तुलसी के पत्तों का इलाज फायदा ही देता है. तुलसी के पत्तों को जीरे के साथ मिलाकर पीस लें और फिर उसे दिन में 3-4 बार खाते रहें. इस तरह से दस्त रुक जाती है.

सांस की दुर्गंध- सांस की दु्र्गंध को दूर करने में भी तुलसी के पत्ते बहुत फायदा करते हैं और नेचुरल होने की वजह से इसका कोई साइडइ इफैक्ट भी नहीं होता है. अगर किसी के मुंह से बदबू आती है तो उन्हें तुलसी का पत्ता चबाना चाहिए इससे दुर्गंध चली जाती है.

चोट लगने- अगर आपको कहीं चोट लग जाए तो तुलसी के पत्ते को फिटकरी के साथ मिलाकर लगाने से घाव जल्दी ठीक होता है. तुलसी में एंटी-बैक्टीरियल तत्व होते हैं जो घाव को पकने नहीं देता है. इसके अलावा तुलसी के पत्ते को तेल में मिलाकर लगाने से उसकी जलन भी कम होती है.

चेहरे की चमक- तुलसी के फायदे चेहरे के लिए बहुत अच्छा होता है. त्वचा संबंधी रोगों में तुलसी खासकर फायदेमंद होता है और इसके इस्तेमाल से कील-मुहांसे खत्म होने के साथ ही चेहरा भी साफ होता है.

कैंसर में- कई शोधों में तुलसी के बीज को कैंसर के इलाज में भी कारगर बताया जाता है, हालांकि अभी तक इसकी पुष्ट‍ि नहीं हुई है. मगर फिर भी तुलसी के बीज के फायदे बहुत होते हैं और उन्हें खाना चाहिए.

तनाव में- एक रिसर्च के मुताबिक तुलसी शरीर में तनाव को बढ़ाने वाले हार्मोन को बाहर निकालती है. इसे ऐंटी स्ट्रेट एजेंट भी कहा जाता है और तुलसी हमारी कोशिकाओं को सामान्य रूप से चलाने में मदद करती है.

पथरी में- अगर आपको पित्त में पथरी या किडनी में पथरी हो गई है तो इसका इलाज भी तुलसी के पत्तों के द्वारा भी कर सकते हैं. किडनी में पथरी मुख्य रूप से खून में यूरिक एसिड बढ़ने से होती है और तुलसी इस यूरिक एसिड को कम करने में सक्षम होता है.


तुलसी के फायदे

तुलसी से होने वाले नुकसान


बचपन से हमने तुलसी के सिर्फ फायदों के बारे मे सुना है लेकिन जो चीज फायदा करती है वो नुकसान भी करती है.इस जादुई जड़ी बूटी में छिपे स्वास्थ्यवर्धक लाभों के कारण ही हम तुलसी का पौधा लगाना चाहते हैं. तुलसी छोटे से लेकर बड़े रोगों को ठीक करने में मदद करती है लेकिन हर पदार्थ की तरह इसके कुछ साइड इफैक्ट भी हो सकते हैं.

1. युजीनाल तुलसी का प्राथमिक तत्व है और ऐसा माना जाता है कि तुलसी के ज्यादा सेवन से शरीर में युजीनाल का स्तर बढ़ सकता है. युजीनाल का बढ़ता स्तर हमारे शरीर के लिए विषेला साबित हो सकता है.

2. तुलसी के ज्यादा सेवन से खून पतला होने का डर रहता है और इसी कारण वालफरिन व हेपरिन जैसी दवाओं को लेने वाले रोगियों को तुलसी का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए क्योंकि तुलसी इन दवाओं में मौजूद खून को पतला करने के गुण की गति को बढ़ा सकती है.

3. हाइपोग्लाइसीमिया एक ऐसी स्वास्थ्य समस्या है जिसमें रोगी के रक्त शर्करा का स्तर सामान्य होता है. अक्सर ये देखा गया है कि अपने उच्च रक्त शर्करा के स्तर को धटाने के लए रोगी तुलसी का सेवन कते हैं जो नहीं करना चाहिए.

4. तुलसी के ज्यादा सेवन करने से मर्दों की प्रजनन शक्ति प्रभावित हो जाती है. इस तर्क को जांचने के लिए खरगोश पर परिक्षण किया गया था और इसके लिए खरगोशों को परीक्षण समूह व सामान्य समूह में विभाजित किया गया. परीक्षण समूहवाले खरगोशों को 30 दिनों तर दो ग्राम तुलसी के पत्ते खाने के लिए दिए गए और इसके बाद परीक्षण समूह के खरगोशों की शुक्राणुओं की संख्या कम होते गए.

5. अगर गर्भावस्था के दौरान महिलाएं तुलसी के पत्तों का सेवन ज्यादा करती हैं तो इसका प्रभाव मां और बच्चे दोनों पर पड़ सकता है. तुलसी खाने से गर्भवती महिलाओँ का गर्भाशय सिकुल जाता है जिससे बच्चे के जन्म के समय समस्या आ जाती है.



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