एड्स: कारण,लक्षण,बचाव,उपचार,रोकथाम

07 मार्च 2019   |  डॉ मुकुल पांडेय   (145 बार पढ़ा जा चुका है)

एड्स: कारण,लक्षण,बचाव,उपचार,रोकथाम

AIDS एक प्रकार की बीमारी है जो HIV वायरस (Human Immunodeficiency virus) के कारण होता है।एचआईवी वायरस हमारे इम्यून सिस्टम में T-cells पर आक्रमण करता है, इससे हमारा प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होती है | शरीर का प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो जाती है तो वायरस, बैक्टीरिया और फुंगी हमारे शरीर पर हमला करके कई बीमारियों को पैदा करते है। यदि एचआईवी वायरस का शुरुआत में ही उसका इलाज नहीं करते है तो यह एड्स बीमारी का रुप धारण कर लेता है| यह मुख्य रूप से असुरक्षित यौन संपर्क और एक सुइयों के कई बार प्रयोग के माध्यम से फैलता है। एड्स का पूरा नाम एक्वायर्ड इम्युनो डेफिसिएंशी सिंड्रोम है।

एड्स बीमारी के कारण

· एक से अधिक लोगों से यौन संबंध ।

· वेश्‍यावृति करने वालों से यौन सम्‍पर्क।

· नशीली दवाईयां इन्‍जेक्शन के द्वारा

· यौन रोगों से पीडित व्‍यक्ति।

· पिता/माता के एच.आई.वी. संक्रमण के पश्‍चात पैदा होने वाले बच्‍चों में।

· बिना परीक्षण किये रक्‍त ग्रहण करने वालों को।

· रात में पसीना आना

· गले में खरास होना

· मांसपेशियों में दर्द

· जोड़ों में दर्द रहना

· ठंड लगना

· तेज बुखार आना

इसके अलावा एड्स मुख्यत 3 कारणों से फैलता है-

1. असुरक्षित यौन संबंधो के द्वारा- AIDS का मुख्य कारण असुरक्षित यौन संबंध भी हो सकता है | किसी एक HIV संक्रमित व्यक्ति के साथ यौन संबंध स्थापित करने से संक्रमण फैल सकता हैं ।



2. बिना परीक्षण के तरल पदार्थ - शरीर के तरल पदार्थ HIV संक्रमण का दूसरा प्रमुख कारणों में से एक है, जो की हमारे रक्त और रक्त संचरण के माध्यम से होता है | एक ही सुई को कई बार प्रयोग करने से, संक्रमित रक्त के आदान-प्रदान से HIV संक्रमण के होने का कारण बन सकता है

3. संक्रमित माता-पिता से- यह संक्रमण संचरण का तीसरा कारण है | यह आम तौर पर गर्भावस्था प्रसव या स्तनपान के दौरान होता है इसलिए बच्चे की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए महिलाओं को यह सिफारिश की जाती है कि वे गर्भावस्था के समय अपना HIV की जाँच कराए |

एड्स के लक्षण

एच.आई.वी. पोजिटिव व्‍यक्ति में 7- 10 वर्षों के बाद विभिन्‍न बीमारिंयों के लक्षण पैदा हो जाते हैं जिनमें ये लक्षण प्रमुख रूप से दिखाई पडते हैः

· गले या बगल में सूजन भरी गिल्टियों का हो जाना।

· लगातार कई-कई हफ्ते अतिसार घटते जाना।

· लगातार काफी समय तक बुखार रहना।

· महीनों तक खांसी का लगातार आना

· बिना वजह के शरीर का वजन निरतंर घटते रहनॉ

· मुंह में घाव का बनना

· त्‍वचा पर दर्द भरे और खुजली वाले चकते हो जाना।




किसी व्‍यक्ति को देखने से एच.आई.वी. संक्रमण का पता नहीं लगाया जा सकता है जब तक कि उसके रक्‍त की जांच नहीं की जाए।

एड्स से बचाव

· जीवन-साथी के अलावा किसी अन्य व्यक्ति से यौन संबंध नही रखे। अगर जरुरी हो तो निरोध का इस्तेमाल करें।

· यौन संबंध स्थापित करते समय निरोध(कण्डोम) का प्रयोग जरुर करें।

· मादक औषधियों के सेवन करने वाले व्यक्ति के द्वारा उपयोग की सिरिंज व सूई का प्रयोग न करें।

· एड्स पीडित महिलाएं गर्भधारण न करें, क्यों कि उनसे पैदा होने वाले‍ शिशु को यह रोग लग सकता है।

· रक्त की जरुरत होने पर किसी अन्जान व्यक्ति का रक्त नहीं लें, और सुरक्षित रक्तो के लिए एच.आई.वी. का जांच किया हुआ रक्त ही ग्रहण करें।

· डिस्पोजल सिरिन्ज एवं सूई तथा अन्य चिकित्सीय उपकरणों को 20 मिनट पानी में उबालकर जीवाणुरहित करके ही उपयोग करें

· किसी दूसरे व्यक्ति का प्रयोग किया हुआ ब्लेड का प्रयोग न करें ।

अगर आप एचआईवी एड्स से ग्रसित है तो ऐसी कई बातें हैं जो आप एचआईवी एड्स को दूसरों में फैलाने से रोक सकते हैं। एचआईवी एड्स से बचने का तरीका में सबसे महत्वपूर्ण एचआईवी (एंटीरेट्रोवाइरल थेरेपी या एआरटी) का इलाज करने के लिए रोज सही तरीके से और नियमित रुप से दवाई का सेवन करना होता है। ये एचआईवी एड्स की दवाएं और एड्स से बचने का तरीका आपको कई सालों तक स्वस्थ रख सकती हैं और आपके साथी को एचआईवी प्रसारित करने की संभावना को बहुत कम कर सकते हैं।



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05 मार्च 2019
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