पित्त की पथरी का अचूक देसी इलाज- Pittay ki Pathri ka Desi Ilaj In Hindi

08 अप्रैल 2019   |  डॉ.स्नेहा दुबे   (150 बार पढ़ा जा चुका है)

Pittay ki Pathri ka Desi Ilaj In Hindi- व्यक्ति के शरीर में दो तरह की पथरियां होती हैं एक पित्त में पथरी और दूसरी गुर्दों यानी किडनी में पथरी, ये दोनों ही बहुत पीड़ा देती है. गलत खानपान की वजह से आजकल के लोगों में गॉलस्टोन यानी पित्त की पथरी की समस्या ज्यादा होने लगी है. पित्ताशय हमारे शरीर का एक छोटा सा अंग है जो लीवर के ठीक पीछे होता है और पित्त में पथरी की गंभीर समस्या से असहनीय दर्द का एहसास होता है. इस पथरी से छुटकारा पाने के लिए आपको अपने खान-पान की आदतों में कुछ ऐसे बदलाव लाने होंगे जिससे आपकी ये बीमारी जल्दी से ठीक हो सके. इसलिए मैं आपको पित्त की थैली का बिना ऑपरेशन के देसी इलाज बताऊंगी.

पित्त की पथरी

कुछ बीमारियां हैं जो साइंस की तरह बढ़ती जा रही है और इसका इलाज भी बनाया जा रहा लेकिन ठीक करने के लिए इसे जड़ से मिटाने का कोई इलाज नहीं बनाया जा रहा है. ये बीमारी इतनी सक्रिय क्योंक है इसका जवाब येहै कि पथरी बनने के कारण का अभी पता नहीं चल पाया है लेकिन माना जाता है कि ये मोटापे, डायबिटीज और आनुवांशिक और रक्त संबंधी बीमारियों की वजह से हो जाती है.


इस तरह बनती है पित्त की पथरी - Cause of Gallstones


पाचन के लिए जरूरी एंजाइम्स को सेव रखने के लिए महत्वपूर्ण अंग पित्ताशय होता है और इससे जुड़ी सबसे प्रमुख समस्या ये है कि इसमें स्टोन बनने की आशंका बहुत ज्यादा होती है जिसे गॉलस्टोन कहा जाता है. जब गॉलब्लैडर में तरल पदार्थ की मात्रा सूखने की कगार पर आ जाती है तो उमसें चीनी-नमक और दूसरे माइक्रोन्यूटि्रिएंट तत्व एक साथ जमा होकर छोटे-छोटे पत्थर के टुकड़ों जैसा रूप धारण कर लेते हैं जिसे डॉक्टरी भाषा में गॉलस्टोन्स कहा जाता है. कुछ पथरियां छोटे साइज में होती हैं कुछ बड़े साइज में होती है और कुछ तो छोटे-छोटे सैकड़ों में भी पथरी हो जाती है. कभी-कभी पित्ताशय में कोलेस्ट्रॉल, बिलीरुबीन और पित्त लवणों का जमाव हो जाता है और इसके कारण भी पित्ताशय में पथरी बन जाती है जो पील और हरे रंग की होती है. इसके अलावा ये भी होते हैं पित्त की पथरी के कारण बनते है.


1.मधुमेह या डायबिटीज


2. मोटापा


3. गर्भधारण


4. मोटापे की सर्जरी के बाद


5. कुछ दवाईयों का सेवन


6. कुछ लंबी अवधि की बीमारियों के बाद


पित्त की पथरी के लक्षण - Symptoms of Gallstones


कई बार की थैली में पथरी बिना किसी लक्षण के हो जाती है और कई बार कुछ ऐसे भी लक्षण होते हैं जो पित्त की थैली में पथरी दिखाई देती है. इसके कुछ ऐसे भी लक्षण होते हैं..


1. पेट के ऊपरी भाग और दाहिनी तरफ में लगातार दर्द बना रहना


2. बदहजमी का हो जाना


3. हर समय खट्टी डकारे आना


4. पेट का बार-बार फूलना


5. पेट में असहनीय दर्द जो गैस के दर्द जैसा लगे लेकिन वो होता नहीं


पित्त की पथरी के कुछ घरेलू उपाय - Home remedy for gallstones


पित्त की पथरी को खत्म करने के लिए बहुत से लोग ऑपरेशन करवाते हैं और इस सर्जरी में जहां मरीज का पेट एक बार खुला कि उसे गैस की समस्या पूरे समय के लिए बन जाएगी. इसिलए कोशिश ये करनी चाहिए कि इस पथरी को घरेलू उपायों से या फिर होम्योपैथिक इलाज से ही निकाला जाए. इसके घरेलू उपाय कुछ इस तरह से हैं..


1. कम से कम 5 दिनों तक सेब का जूस पिएं और सेब का ये रस घर ही बनाएं. ध्यान रहे कि बाजारा का डिब्बे वाला एप्पल जूस नहीं पिएं और 5 दिन जूस पीने के साथ ही 3 से 4 सेब जरूर खाएं.


2. 5 दिनों तक सेब का जूस पीने के बाद छठवें दिन से गुनगुने पानी में एक चम्मच सेंधा नमक, मिलाकर पिएं और ऐसा ही आपको दो घंटे के बाद फिर करना है. ऐसा क्रम आप बना लें और हर दिन कम से कम 4 बार दो-दो घंटे के अंतराल में इसका सेवन करें.


3. रात के समय आधा कप जैतून यानी ऑलिव ऑयल को आधा नींबू के रस के साथ पिएं. अगले दिन सुबह आपको स्टूर के साथ कुछ हरे पत्थर भी निकलते दिखेंगे.


4. पतरी को पेशाब के रास्ते से निकालने के लिए आपको नियमत रूप से सेब साइडर का सिरका भी पीना होगा जो सेहत के लिए बहुत फायदेमंद साबित होता है.


5. चुकंदर, खीरा और गाजर का जूस काला नमक मिलाकर हर दिन एक गिलास पीएं. ये आपके पेट की सफाई करेगा, विटामिंस देगा और आपके पित्त की पथरी भी हटाएगा.


6. पुदीने में टेरपेन नाम की एक प्राकृति तत्व होता है और ये पित्त की पथरी को घुलाने के लिए जाना जाता है. यह पित्त प्वाह और दूसरे पाचक रस को उत्तेजित करके हटाने में मददगार होता है.


7. इसबगोल एक फाइबर आहार है जो पित्ताशय की थैली की पथरी के इलाज के लिए बहुत जरूरी है. इसबगोल घुलनशील फाइबर का अच्छा स्रोत माना जाता है और पित्त में कोलेस्ट्रोल को बांधने के साथ-साथ पथरी को बढ़ने से रोकता है.


8. नींबू का रस प्राकृतिक रूप से अम्लीय होने की वजह से यह सिरके की तरह काम करता है और लीवर में कोलेस्ट्रॉल को बनने से रोकता है. इसलिए हर रोज खाली पेट चार नींबू का पस पीना फायदेमंद साबित होता है.



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डॉ.स्नेहा दुबे
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