क्या है थायराइड ? जानिए इसके लक्षण और उपचार - Thyroid In Hindi

16 अप्रैल 2019   |  डॉ.स्नेहा दुबे   (212 बार पढ़ा जा चुका है)

Thyroid In Hindi- आजकल बहुत से लोग थायराइड (Thyroid) से पीड़ित हैं और इसमें वजन बढ़ने के साथ-साथ हार्मोन असंतुलन भी हो जाते हैं. एक रिसर्च के मुताबाकि पुरुषों की तुलना में महिलाओं को थायराइड की समस्या ज्यादा होती है और इसका मुख्य कारण महिलाओं में ऑटोम्यून्यून की समस्या का होना है और हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक, थायराइड हार्मोन शरीर के अंगों के लिए सामान्य कामकाज के लिए जरूरी होते हैं. मैं इस लेख में आपको बताऊंगी कि थायराइड क्या है, इसके क्या लक्षण हैं और इसके क्या उपाय होते हैं.


थायराइड


क्या है थायराइड - What is Thyroid ?


हाइपरथायरायडिज्म से एट्रियल फिब्रिलेशन, ऑस्टियोपोरोसिस और फ्रैक्चर होने की संभावना होती है और वहीं हाइपोथायरायडिज्म, मायक्सेडेमा कोमा और मृत्यु का कारण भी बन जाता है. थायराइड समस्याओं का सबसे आम कारण ऑटोम्यून्यून थायराइड रोग (एआईटीडी) है और यह एक वंशानुगत यानी जेनेटिक स्थिति है. जिसमें प्रतिरक्षा प्रणाली एंटीबॉडी उत्पन्न करती है. ये थायराइड ग्रंथियों को अधिक हार्मोन बनाने के लिए उत्तेजित करती है. थायराइड एक एंडोक्राइन ग्लैंड है जो बटरफ्लाई के आकार का होता है और ये गले में स्थित होता है. इसमें से थायराइड हार्मोन निकलता है जो सरीर के मेटाबॉलिज्म को संतुलित करता है. थायराइड ग्लैंड शरीर से आयोडीन की मदद से हार्मोन बनाता है और थायराइड हार्मोन का स्राव जब असंतुलित होता है तो शरीर में कई तरह की समस्याएं होने लगती हैं. वैसे थायराइड दो प्रकार के होते हैं -


1.Hypothyroid - इसमें थायराइड ग्लैंड स्क्रिय नहीं होता है, जिससे शरीर में जरूरत के अनुसार T3, T4 हार्मोन नहीं पहुंचता है. इसकी वजह से शरीर का वजन अचानक बढ़ता है , सुस्ती महसूस होने लगती है. सरीर में रोगों से लड़ने की शक्ति कम होने लगती है और अनियमित पीरियड, कब्ज, चेहरे और आंखों में सूजन का आना आम होता है. ये बीमारी 30 से 60 साल की महिलाओं में ज्यादा होती है.

2. Hyperthyroid - इसमें थायराइड ग्लैंड बहुत ज्यदाा सक्रिय होता है. T3, T4 हार्मोन की जरूरत से ज्यादा मात्रा में निकलकर ब्लड मे घुलता है. इस हालत में शरीर का का वजन एकदम से कम होने लगता है, मांसपेशियां कमजोर हो जाती है, भूख ज्यादा लगती है, ठीक से नींद नहीं आती, स्वभाव चिड़चिड़ा जाता है. पीरियड्स में अनियमिता, ज्यादा ब्लीडिंग की समस्या और गर्भपात का खतरा भी बन जाता है.


थायराइड के लक्षण - Symptoms of Thyroid


ज्यादा काम नहीं किया फिर भी थकान महसूस होने लगे या खान-पान पर ध्यान देते हैं फिर भी वजन तेजी से बढ़ रहा हो. शरीर में कई बदलाव आने लगे जिनको हम हल्के में लेते हैं और बाद में यह बीमारी इतनी गंभीर बन जाती है कि हमें एक रोग का संकेत मिलने लगता है तो आपको एक बार थायराइड का चेकअप जरूर कराना चाहिए. फिलहाल आपको इन लक्षणों से पहचानिए कि कहीं आपको थायराइड तो नहीं है ?


1. हाइपोथायराइड यानी शरीर में टीएसएच ज्यादा और T3, T4 कम होने से मांसपेशियों में जोड़ों में अक्सर दर्द होता है.

2. थायराइड बढ़ने से गर्दन में सूजन की संभावना भी बढ़ने लगती है. गर्दन में सूजन या भारीपन का एहसास हो तो तुरंत डॉक्टर के पास जाइए.

3. हाइपोथायराइड की स्थित में त्वचा में रूखापन, बालों का झड़ना, भौंहों के बालों का झड़ना जैसी समस्याएं सामने आ जाती हैं जबकि हाइपरथायराइड में बालों का तेजी से झड़ने लगता है और वो संवेदनशील हो जाता है.

4. लंबे समय तक कांसटिपेशन की समस्या हाइपोथायराइड में होती है जबकि हाइपरथायराइड में डायरिया की समस्या बार-बार होती है.

5. महिलाओं को पीरियड्स के दौरान थायराइड की स्थिति में पेट दर्द होता है और वहीं हाइपोथायराइड में अनियमित पीरियड्स भी रहते हैं. थायराइड की स्थिति में गर्भ धारण करने में भी दिक्कत होती है.

6. हाइपोथायराइड की स्थिति में अक्सर तेजी से वजन बढ़ने लगता है और कॉलेस्ट्रोल का स्तर भी बढ़ने लगता है. वहीं हाइपरथायराइड में कोलेस्ट्रोल कम भी हो जाता है.

7. अगर बिना ज्यादा मेहनत के बाद भी आप थकान महसूस कर रहे हैं या छोटी-छोटी बातों में घबराहट होने लग रही है तो ये थायराइड का संकेत हो सकता है.

8. थायराइड की समस्या होने पर आदमी हमेशा ही डिप्रेशन में रहता है. उसका किसी भी काम में मन नहीं लता है, दिमाग की सोचने और समझने की शक्ति कमजोर होने लगती है. इसमें याद्दाश्त भी कमजोर होने लगती है.

9. अगर आपके घर या परिवार के किसी सदस्य को थायराइड है तो आपको भी इसके होने की संभावना ज्यादा बढ़ सकती है.

10. थायराइड होने पर मरीज के हाथ-पैर हमेशा ठंडे रहते हैं. मानव शरीर का तापमान सामान्य यानी 98.4 डिग्री फॉरनहाइट (37 डिग्री सेल्सियस) हो जाता है.


थायराइड


थायराइड से बचने के घरेलू उपाय - Home Remedies for Thyroid


थायराइड का चेकअप कराते ही आपको इसका इलाज कराना चाहिए. वैसे आपको बता दें कि थायराइड का इलाज मरीज की उम्र, ग्रंथि कितने हार्मोन बना रही और मरीज की चिकित्सिक परिस्थित कैसी है इसके अनुसार किया जाता है. इसका इलाज डॉक्टर्स के परामर्श पर ही कराना चाहिए लेकिन इसके अलावा आपको कुछ घरेलू उपचारों को भी अपनाना चाहिए.

अश्वगंधा- अश्वगंधा कैप्सूल जो कि एक आयुर्वेदिक औषधि है. ये थायराइड हार्मोंस को संतुलित करने का काम करती है और अक्सर इसका इस्तेमाल प्रकिरोधक क्षमता को बेहतर बनाने में किया जाता है. इसके साथ ही यह तनाव को कम करके शारीरिक क्षमता को बेहतर बनाता है. इन खूबियों के कारण ही थायराइड के इलाज में अश्वगंधा अच्छा विकल्प है.

एसेंशियल ऑयल - एसेंशियल तेल को नारियल के तेल में मिक्स कर लें. अब इस तेल को थायराइड के एक्यूप्रेशन प्वाइंट पर लगाएं. ये प्वाइंट गले, टांग के निचले हिस्से और पैर के नीचे होता है.इन प्वाइंट्स पर करीब दो मिनट तक मालिश करें और तेल को त्वचा के अंदर सोखने के लिए छोड़ दें. शरीर में कहीं भी सूजन हो तो इस तेल की मालिश से फायदा मिलता है और थायराइड के लिए ये रामबाण उपाय माना जाता है.

लोबान का तेल - लोबान का तेल और नारियल के तेल को मिक्स कर लें और अब इसे गर्दन, पैरों के नीचे, और थायराइड के दूसरे एक्यूप्रेसर प्वाइंट पर लगाएं. आप इसका प्रयोग खाने में भी कर सकते हैं, इससे थायराइड जैसी समस्याएं खत्म हो जाती हैं. यह तेल पाचन तंत्र को अच्छा बनाता है और मस्तिष्क की कार्यप्रणाली भी बेहतर करता है.

अलसी का पाउडर- एक चम्मच अलसी के पाउडर को एक गिलास दूध या फलों के रस में मिलार पीना चाहिए. इसे आप दिन मे दो बार भी पी सकते हैं और इसका अल्फा लिनोलेनिक एसिड यानी ओमेगा-3 का बेहतर स्त्रोत माना जाता है. अलसी थायराइड हार्मोंस के निर्माण में मदद करती है और इसमें पाइथोएस्ट्रोजेनिक गुण भी होता है जो यौन संबंदी हार्मोंस को भी संतुलित करता है. मगर याद रहे कि दिन में एक या दो चम्मच से ज्यादा अलसी का पाउडर इस्तेमाल नहीं करें.

नारियल का तेल - एक या दो चम्म्च 100 प्रतिशत वर्जिन नारियल का तेल जिसे आप हर दिन प्रयोग में ला सकते हैं. आप इसका सेवन सीधे या सलाद या फिर खाना बनाने में कर सकते हैं3.नारियल के तेल में मध्यम स्तर का फैटी एसिड होता है जो कई लिहाज से गुणकारी माना जाता है. हर दिन नारियल तेल का सेवन करने से शरीर का मेटाबॉलिज्म और तापमान अच्छा हो जाता है.




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