टीबी होने के कारण, लक्षण और इसके उपचार - TB Treatment in Hindi

24 अप्रैल 2019   |  डॉ.स्नेहा दुबे   (34 बार पढ़ा जा चुका है)

TB Treatment in Hindi- कुछ समय पहले महानायक अमिताभ बच्चन ने खुलासा किया था कि एक समय में वे भी टीवी की बीमारी से पीड़ित थे लेकिन अब इलाज के बाद वे पूरी तरह से स्वस्थ हैं. कुछ समय तक उन्होंने टीबी इलाज के प्रति जागरुकता के लिए उन्होंने विज्ञापन भी किया है और अपील की कि इस बीमारी को लोगों को सीरियसली लेना चाहिए. बहुत से लोगों में ये बात फैली हुई है कि टीबी होने पर इंसान बच नहीं पाता लेकिन अब टीबी का इलाज पूरी तरह से संभव हो चुका है. 24 मार्च को वर्ल्ड टीबी डे मनाया जाता है और कोशिश की जाती है कि ज्यादा से ज्यादा मरीजों को एक अच्छा जीवन प्रदान किया जा सके.




क्या होती टीबी की बीमारी ? What is TB Disease


टीबी का पूरा नाम ट्यूबरक्यूलोसिस है और ये फेफड़ों से जुड़ी एक खतरनाक बीमारी होती है. भारत में टीबी के मरीजों की संख्या लाखों में है, एक समय था जब इसका उपचार बहुत मुश्किल होता था लेकिन अब इसके लक्षण पता चलते ही इसका उपचार भारत में ही आसानी से किसी भी बड़े शहर के अस्पताल में संभव हो गया है. सरकार ने बहुत से प्रयास किए फिर भी हर साल लाखों की संख्या में इस बीमारी के कारण लोग जान गंवाते हैं. टीबी को क्षय रोग भी कहा जाता है जो एक संक्रामक बीमारी होीत है और ये माइोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस नाम के जीवाणु की वजह से होती है. ये जीवाणु व्यक्ति को हवा के संपर्क में आने से हो जाती है.


टीबी के बैक्टीरिया आपकी सांस के साथ फेफड़े में पहुंचे हैं और इस जीवाणु की संख्या धीरे-धीरे बढ़ने लगती है. इन संक्रमण के कारण फेफड़े में छोटे-छोटे जख्म बन जाते हैं और इसका पता एक्सरे द्वारा लगाया जाता है. अगर आपके शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कम हो गई है तो टीबी के बैक्टीरिया आपके शरीर पर अटैक आसानी से कर सकते हैं और रोगिों के फेफड़ों या लिम्फ ग्रंथियों में टीबी के बैक्टीरिया पाए जाते हैं.


टीबी के लक्षण - TB Symptoms in Hindi


टीबी होने पर कुछ ऐसे लक्षण सामने आते हैं जिसके बाद आपको एक बार चेकअप करा ही लेना चाहिए. ज्यादातर रोगियों में रोग के लक्षण उत्पन्न नहीं होते हैं लेकिन मरीज पूरी तरह से रोगग्रस्त हो जाता है. फिर भी मेरे बताए इन लक्षणों से आप पहचान सकते हैं..

1. दो हफ्तों से ज्यादा लगातार खांसी का आना

2. हल्का बुखार और हरारत बने रहना

3. अचानक वजन का कम होने लगना

4. सीने में दर्द रहना

5. थकावट और रात में पसीना आना

6.कमर की हड्डी में सूजन रहना

7. घुटने मोड़ने में कठिनाई

8. गहरी सांस लेने में सीने में दर्द होना

9.खांसते-खांसते अचानक खून आ जाना


टीबी होने के कारण - Cause of TB


1. टीबी रोग वैसे तो कई कारणों से होता है इसका प्रमुख कारण निर्धनता, गरीबी के कारण अपर्याप्त पौष्टिक आहार, कम जगह में बहुत लोगों का रहना और स्वच्छता का अभाव या फिर गाय का कच्चा दूध पीना.

2. जिस व्यक्ति को टीबी है उसके संपर्क में रहना और उसकी चीजों का प्रयोग करना या जिस जगह पर मरीज सांस ले रहा है वहां पर रहना.

3. टीबी के मरीज द्वारार यहां-वहां थूक देने से भी इसके विषाणु उड़कर स्वस्थ व्यक्ति पर आक्रमण कर देते हैं.

4. मदिरापान और धूम्रपान करने वाले भी टीबी की चपेट में आ जाते हैं. इसके साथ ही स्लेट फैक्टरी में काम करने वाले मजदूरों को भी इसका खतरा ज्यादा हो जाता है.

5. अक्सर देखा जाता है कि अगर ये रोग माता या पिता दोनों में से किसी एक को है तो बच्चे को भी होना तय होता है. लेकिन अगर आप इस बीमारी के दौरान बच्चे को खुद से दूर रखें तो बच्चा बच सकता है.

6. जो लोग बहुत ज्यादा गीली जगह पर रहते हैं उन्हें भी टीबी होने का खतरा बना रहता है. इसके अलावा जो धूल के कण भरे वातावरण में रहते हैं उन्हें भी ऐसा खतरा होना मुमकिन होता है.

7. जब कोई व्यक्ति अपनी क्षमता से ज्यादा काम करता है तब उसे क्षय रोग होने की संभावना ज्यादा हो जाती है.




टीबी का इलाज - TB Treatment in Hindi


सीने के एक्सरे में थूक या बलगम की जांच से टीबी का पता लगाया जाता है. रोग का Diagnosis होने पर एंटीबायोटिक्स और एंटीबैक्टीयल दवाओं द्वारा उपचार किया जाता है. रोगी को लगातार 6 से 9 महीने तक उपचार कराना पड़ता है और दवाओं के सेवन में अनियमितता बरतने पर इस रोग के बैक्टीरिया में रोग के प्रतिरोधक क्षमता पैदा होती है और इसके कारण उन पर दवा का असर नहीं होता है. यह स्थिति रोगी के लिए खतरनाक हो जाती है और उपचार के दौरान ही मरीज को शराब या धूम्रपान से बचना चाहिए, इसके अलावा आप इन घरेलू नुस्खों से भी मरीज को बचा सकते हैं.

लहसुन- लहसुन में ज्यादा मात्रा में सल्फयूरिक एसिड पाया जाता है जो टीबी के कीटाणुओं का खात्मा करते हैं. इसके लिए आपको आधा चम्मच लहसुन, 1 कप दूध और 4 कप पानी को एक साथ उबालना होगा. इसके बाद जब ये मिश्रण तैयार हो जाए तो इसे दिन में 3 बार पीने से टीबी रोग में फायदा मिलता है.

केला - 1 पके हुए केले को मैश करके नारियल पनी में मिला लीजिए और इसके बाद इसमें शहद और दही मिलाकर दिन में दो बार खाएं. टीबी के रोगी को इसमें फायदा मिलता है इसके अलावा केला का जूस भी आपको रोग के दौरान हर दिन पीना चाहिए.

आंवला - कच्चे आंवले को पीसकर जूस बना लीजिए और फिर उसमें 1 चम्मच शहद मिलाकर हर दिन पीजिए, इससे आपको जरूर फायदा होगा.

संतरा - ताजा संतरे का जूस और उसमें नमक और शहद मिलाकर हर दिन सुबह और शाम पिएं. इसके अलावा संतरा खाने से भी टीबी के रोगी को फायदा होता है, संतरे में पाया जाने वाला एसिड टीबी के जीवाणुओं को मारने में मदद करता है.

काली मिर्च- फेफड़ों में जमा कफ और खांसी को दूर करने के लिए काली मिर्च बहुत फायदेमंद होती है. इसके लिए थोड़े से मक्खन में 8-10 काली मिर्च फ्राई करके उसमें एक चुटकी हींग मिलाकर पीस लें और फिर इस मिश्रण को तीन भागों में बांटकर दिन में 7 से 8 बार खाएं.

अखरोट- अखरोट को पीसकर उसका पाउडर बना लीजिए और इसमें लहसुन की कलियां मिला लें. अब इसके बाद घर में बना ताजा मक्खन मिलाकर खाने से भी टीबी की बीमारी जल्दी से ठीक होती है.

छुहारा- शाम में 150 ग्राम दूध में छुहारा भिगों दे और फिर रात में सोने से पहले छुहारा इसी दूध में अच्छे से उबालकर गुठली को फेंक दं. इसके बाद उस छुहारे को अच्छी तरह से चबाकर खाइए, और वो दूध भी पी लीजिए. ऐसा आपको हर दिन करना होगा इससे फेफड़ों को बहुत शक्ती मिलती है और टीबी रोक का ट्रीटमेंट होता है.


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