स्किन कैंसर- प्रकार, लक्षण, कारण

30 मई 2019   |  डॉ अंजली कश्यप   (27 बार पढ़ा जा चुका है)

कैंसर के बारे में आज कल सभी को पता चल गया है क्योंकि इस खतरनाक रोग के शिकार अनेक लोग बनते आ रहे है और ये संख्या दिन प्रतिदिन बढती ही जा रही है। कैंसर आज कल के दिनों में ज्यादा घातक रोग नहीं रहा है क्योंकि मेडिकल साइंस ने इतनी उन्नति प्राप्त कर ली है की लोग अलग प्रकार के कैंसर से छुटकारा पा सकते है।









स्किन कैंसर- प्रकार, लक्षण, कारण



स्किन कैंसर आजकल आम बिमारियों की तरह हो गया। आप भी स्किन कैंसर का शिकार हो सकती हैं।आज भी ज्या दातर लोगों का मानना हैं कि त्वपचा कैंसर के विकसित होने औसत दर बहुत कम हो रही है, लेकिन यह बात सही नहीं हैं। पिछले चार दशकों में मेलानोमा की दरों में 800 प्रतिशत की दर से वृद्धि हुई है। जिसके कारण 25 और 29 के आयु वर्ग की महिलाओं के बीच यह सबसे आम कैंसर बना गया है। ये आमतौर पर सिर, चेहरे, गर्दन, हाथ और भुजाओं में बनते हैं। स्किन कैंसर का एक अन्य प्रकार,मेलेनोमा, ज्यादा खतरनाक नही लेकिन कम सामान्य है।



स्किन कैंसर रोग के प्रकार

  • मलिगंत मेलेनोमा

  • बसल सेल कार्सिनोमा

  • स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा

  • स्किन लिंफोमा

  • स्किन अद्नेक्साल ट्यूमर

  • मर्केल सेल कार्सिनोम

  • कपोसी सार्कोमा

  • कैरातोअकान्थोमस




स्किन कैंसर होने के लक्षण


  • धूप में रहने से खुजली या जलन होना

  • गर्दन, माथे, गाल और आंखों के आसपास की स्किन लाल होना और जलन होना

  • बर्थ मार्क की स्किन में बदलाव हो जाना

  • स्किन पर कई हफ्तों तक धब्बे पड़े रहना

  • बार-बार एक्जिमा होना

  • मौजूदा तिल में बदलाव

  • त्वचा पर वर्णक या असामान्य दिखने वाला विकास










स्किन कैंसर होने के कारण


  • सूर्य के संपर्क में कम आना- सूरज के संपर्क में मेलानोमा का खतरा दोगुना हो जाता है और दुर्भाग्य से, अधिकांश लोग इसके सही संपर्क की राशि से अनजान हैं। लेकिन तथ्य यह है कि 35 साल की उम्र से पहले सूर्य के संपर्क में ना आने से मेलानोमा की आशंका 75 प्रतिशत तक बढ़ जाती है। कैंसर के संबंध में किए गए अध्ययन से यह बात सामने आई है कि सूर्य की तेज किरणें न केवल त्वचा के कैंसर के जोखिम को कम सकती है वह स्तन और फेफड़े के कैंसर को भी नियंत्रित कर सकती हैं।


  • एक बार सनस्क्रीन लगाकर भूल जाना- हम में से अधिकांश लोग बाहर धूप में जाने से पहले या स्विमिंग पूल में जाते समय सनस्क्रीखन लोशन का इस्तेंमाल करते हैं और सोचते हैं कि हम पूरे दिन के लिए सुरक्षित हो गये। लेकिन ऐसा नहीं है धूप में निकलने से कम से कम 20 मिनट पहले सनस्क्रीन लगाने से ही फायदा मिलता है। ऐसा करने से सनस्क्रीन लोशन आपकी त्वचा में अच्छे तरीके से मिल जाता और सूर्य की किरणों के प्रभाव को बेअसर करने में मददगार होता है और यदि आप स्विमिंग करने जा रहे हैं तो वाटरप्रूफ सनस्क्रीन लोशन का इस्तेमाल करें। इसके साथ ही अगर आप ज्या दा समय बाहर बिताने की योजना बना रहे हैं तो हर दो घंटे के बाद सनस्क्री न लोशन लगाये।


  • धूप में ज्यादा देर रहना- कुछ लोगों का काम ऐसा होता है कि उन्हें ज्यादातर समय धूप में रहना पड़ता है और कुछ लोगों को सर्दियों में धूप में बैठना पसंद होता है। कुछ लोग धूप में इसलिए भी घंटों बैठे रहते हैं कि इससे हमें विटामिन डी मिलता है। लेकिन आपको बता दें कि धूप में ज्यादा देर रहना खतरनाक है क्योंकि इससे स्किन कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। ये सच है कि धूप की किरणें विटामिन डी का अच्छा स्रोत हैं लेकिन ओजोन पर्त में छेद होने के कारण इन किरणों के साथ हानिकारक अल्ट्रावॉयलेट किरणें भी आती हैं, जो हमारी त्वचा को नुकसान पहुंचाती हैं। ऐसा नहीं है कि इस डर से आप धूप लेना ही छोड़ दें क्योंकि शरीर को विटामिन डी की जितनी जरूरत होती है उसका 40% हिस्सा हमें धूप से ही मिलता है इसलिए धूप शरीर के लिए जरूरी भी है। लेकिन अगर आप स्किन कैंसर से बचना चाहते हैं तो दोपहर की तेज धूप में आधे घंटे से ज्यादा लगातार बैठना आपके लिए सही नहीं है। इसकी बजाय सुबह की गुनगुनी धूप में एक घंटे बैठना लाभप्रद है क्योंकि उस समय धूप में अल्ट्रावॉयलेट किरणों का प्रभाव कम होता है और आपके शरीर को विटामिन डी भी भरपूर मिल जाता है।


  • सनस्क्रीन का इस्तेमाल न करना- अगर आप दिन में घर से बाहर निकल रहे हैं तो आपके लिए सनस्क्रीन का इस्तेमाल बेहद जरूरी है। कई बार धूप तेज नहीं होती है या आप सुबह हल्की धूप में कहीं जाते हैं तो सोचते हैं कि सनस्क्रीन का इस्तेमाल करना गैर जरूरी है। लेकिन आपका ऐसा सोचना गलत है क्योंकि दिन में धूप भले ही तेज न हो लेकिन हानिकारक अल्ट्रावॉयलेट किरणों से त्वचा के नुकसान की संभावना तब भी होती है। इसलिए दिन में घर से बाहर निकलने से 15-20 मिनट पहले शरीर के उन अंगों पर सनस्क्रीन का जरूर इस्तेमाल करें जो सीधे धूप के संपर्क में आती हैं जैसे चेहरा, हाथ, पैर, गर्दन आदि। अगर आप स्विमिंग करने जा रहे हैं या आपको पसीना बहुत ज्यादा आता है तो आपके लिए वाटरप्रूफ सनस्क्रीन का इस्तेमाल ठीक रहेगा। सनस्क्रीन सूजन की हानिकारक अल्ट्रावॉयलेट किरणों के प्रभाव से हमें बचाता है और स्किन कैंसर जैसे रोगों से हमारी रक्षा करता है।अगर आप दिन में घर से बाहर निकल रहे हैं तो आपके लिए सनस्क्रीन का इस्तेमाल बेहद जरूरी है। कई बार धूप तेज नहीं होती है या आप सुबह हल्की धूप में कहीं जाते हैं तो सोचते हैं कि सनस्क्रीन का इस्तेमाल करना गैर जरूरी है। लेकिन आपका ऐसा सोचना गलत है क्योंकि दिन में धूप भले ही तेज न हो लेकिन हानिकारक अल्ट्रावॉयलेट किरणों से त्वचा के नुकसान की संभावना तब भी होती है। इसलिए दिन में घर से बाहर निकलने से 15-20 मिनट पहले शरीर के उन अंगों पर सनस्क्रीन का जरूर इस्तेमाल करें जो सीधे धूप के संपर्क में आती हैं जैसे चेहरा, हाथ, पैर, गर्दन आदि। अगर आप स्विमिंग करने जा रहे हैं या आपको पसीना बहुत ज्यादा आता है तो आपके लिए वाटरप्रूफ सनस्क्रीन का इस्तेमाल ठीक रहेगा। सनस्क्रीन सूजन की हानिकारक अल्ट्रावॉयलेट किरणों के प्रभाव से हमें बचाता है और स्किन कैंसर जैसे रोगों से हमारी रक्षा करता है।


  • त्वचा रोगों को सामान्य समझना- आमतौर पर लोग त्वचा रोगों को गंभीरता से नहीं लेते हैं और सोचते हैं कि ये आसानी से ठीक हो जाएंगे। त्वचा पर होने वाले ज्यादातर परिवर्तन शरीर में खून की खराबी के कारण होती हैं। दरअसल कई बार हमारे खून में मिली हुई अशुद्धियों और जहरीले पदार्थों को हमारी किडनी साफ नहीं कर पाती है, तो इसका प्रभाव हमारी त्वचा पर दिखने लगता है। शरीर में फुंसी, पिंपल, स्किन इंफेक्शन, फंगल इंफेक्शन, मस्से आदि का यही कारण है। जब त्वचा पर पहले से कोई रोग हो जिसमें लगातार परिवर्तन हो रहा हो और वो ठीक न हो रहा है तो ये लक्षण स्किन कैंसर के हो सकते हैं। स्किन कैंसर का खतरा उन लोगों को भी ज्यादा होता है जिनकी त्वचा पर टैग्स, मस्से, तिल और फंगल इंफेक्शन ज्यादा होते हैं। इन लोगों को धूप की हानिकारक किरणों से बचाव की ज्यादा जरूरत होती है।






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