डिप्रेशन से दूर रहना है तो अपनाइए ये आसान उपाय

14 जून 2019   |  डॉ.स्नेहा दुबे   (67 बार पढ़ा जा चुका है)

आजकल के समय में हर इंसान के लिए नॉर्मल रह पाना मुश्किल है. हर व्यक्ति अपने किसी ना किसी निजी परेशानियों के बारे में चिंतित रहता है, बस कुछ लोग किसी ना किसी को बता देते हैं तो कुछ लोग अपने अंदर ही रखे रहते हैं. किसी को अपनी परेशानी बता देना अच्छा है लेकिन अगर आपने किसी बात को अपने मन या दिमाग में उतार लिया तो आपको अवसाद यानी डिप्रेशन घेर सकता है. डिप्रेशन में जाने के बाद व्यक्ति ना कुछ सोच पाता है और ना कर पाता है, उसे बस हर समय अकेले में रहने का मन करता है और यही अवसाद का सबसे बड़ा लक्षण होात है. यहां मैं आपको depression ka gharelu ilaj बताने जा रही हूं क्योंकि हर बीमारी में दवाओं का बोझ लेने से शरीर में दूसरी परेशानियां भी हो सकती हैं.


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डिप्रेशन क्या होता है ?


व्यक्ति ईश्वर की ऐसी संरचना है जो अपने अंदर समुंद्र से भी गहरी बात को दबा सकता है मगर कुछ लोग गले तक भी नहीं रख पाते. अपनी बातों को किसी से ना कह पाने वाले अक्सर अपने अंदर ही घुटते रह जाते हैं और उन्हें एक मानसिक बीमारी हो जाती है. कुछ लोगों को ये कम समय के लिए होती है तो कुछ लोगों को ये बीमारी पागल भी बना सकती है. व्यस्तता के कारण जब इंसान अपने लिए समय नहीं निकाल पाता या उसे कोई बात चुभ रही है लेकिन वो बोल नहीं पा रहे तभी मानव मस्तिष्क सोचने का काम बंद कर देता है और ऐसे में अवसाद का शिकार व्यक्ति हो जाता है. जब डिप्रेशन भयंकर बीमारी का रूप लेती है तब व्यक्ति का का मन जिंदगी से भर जाता है और कुछ लोग तो गलत कदम तक उठा लेते हैं. मगर डिप्रेशन से निकलने के लिए आपको खुद को समय देना चाहिए और कुछ घरेलू उपाय भी करने चाहिए. यहां मैं आपको डिप्रेशन से जुड़ी कुछ जानकारियां देती हूं-

1. इस बात को सिद्ध किया जा चुका है कि हर साल पूरी दुनिया के लगभग 35 करोड़ लोग डिप्रेशन के शिकार होते हैं.

2. डिप्रेशन होने के मुख्य लक्षण हमेशा चिंता करना, काम में मन ना लगना, छोटी छोटी बातों पर गुस्सा करना, कम बोलना होते हैं.

3. डिप्रेशन में इंसान ऐसे खतरनाक कदम उठा लेता है, जो उसे नहीं उठाना चाहिए, जैसे कि शरीर को नुकसान पहुंचाना या आत्महत्या करने की कोशिश करना.

4. ऐसा माना जा रहा है कि साल 2030 तक डिप्रेशन व्यक्ति पर इतना हावी हो जाएगा कि उनकी असमर्थता का दूसरा सबसे बड़ा कारण बन सकता है.

5. डिप्रेशन की बीमारी आज की नही है बल्कि ये हमारे पूर्वजों के ज़माने से चली आ रही है. मगर चिंता की बात ये है कि 21वीं सदी में इसका प्रभाव पहले से 10 गुना ज़्यादा देखने को मिल रहा है.

6. महिलाएं पुरुषों के मुकाबले डिप्रेशन की शिकार बहुत ज्यादा होती है..

7. आजकल लोग इंटरनेट पर समय ज्यादा बिता रहे हैं और इस वजह से अक्सर मानसिक परेशानियों से जूझ रहे हैं.

8. डिप्रेशन के कारण इंसान अपना लगभग 65% समय चिंतित होकर गुज़ार देते हैं.

9. इंसान 18-33 साल की उम्र तक सबसे ज़्यादा तनाव में रहता है.

10. तनाव में रहने वाले व्यक्ति खुद से और दूसरों से झूठ बोलने की आदत में घिर जाते हैं. वैसे व्यक्ति हमेशा परिस्थितियों का सामना करने में भी कतराते रहते हैं.


डिप्रेशन के लक्षण


डिप्रेशन से उबरने के लिए इसके लक्षणों को पहचानना बहुत जरूरी होता है. ऐसा इसलिए क्योंकि इस बारे में तभी आप दूसरों से मदद मांग सकते हैं अगर सही समय पर आपको इसका पता चलेगा कि आपकी जिंदगी में सबकुछ सही नहीं चल रहा है. जानिए डिप्रेशन के कुछ लक्षण-

1. ठीक से नींद ना आना

2. कम भूख लगना

3. अपराध बोध रहना

4. आत्मविश्वास में कमी

5. थकान और सुस्ती महसूस होना

6. उत्तेजना या शारीरिक व्यग्रता

7. एल्कोहल या मादक पदार्थों का सेवन करने लगना

8. खुदखुशी का ख्याल आना

9. किसी काम में दिलचस्पी ना होना

10. हमेशा अकेला रहना


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डिप्रेशन से बचने के उपाय


डिप्रेसन पर काबू करना एक बहुत बड़ी सफलता होती है. डिप्रेशन को उस आदमी से दूर करना एक समस्या है लेकिन परिवार और दोस्तों की दया, प्रेम और भावपूर्ण समर्थन से ये सब संभव है. अगर आप डिप्रेशन में हैं तो डॉक्टर के पास जाने से पहले कुछ घरेलू उपायों को जरूर कर लीजिए. हो सकता है कि ये उपाय दवाईयों से ज्यादा आपको डिप्रेशन से छुटकारा दिलवा सके. घरेलू उपायों को करते हुए अपने पर विश्वास रखिए और अपना मनोबल टूटने नहीं दीजिए. अपनी आशा को अपने अंदर रखते हुए खुश रहने की कोशिश करिए. अगर आप सच में डिप्रेशन से बचना चाहते हैं तो इस बारे में खुलकर बात करें. हर दिन की जिंदगी में छोटे-छोटे बदलाव लाते हुए खुत को व्यवस्थित करिए. खुद को समय दें औ अपने शरीर के लिए कुछ ना कुछ करें. चलिए बताते हैं आप किस तरह से इस बीमारी से बाहर निकल सकते हैं.

बातें करके मदद मांगे- अवसाद से गुजर रहे लोगों के लिए इससे उबरने के लिए जरूरी है कि किसी एक से अपनी बातें कहे. जिनपर आपको भरोसा हो उनके संपर्क में रहकर अपने अंदर की सारी बातें उनसे कह दें. परिस्थितियों से लड़ने के लिए उनसे मदद मांगे लेकिन इस बात का ख्याल रहे जिसे आप बता रहे हों कहीं वो आपकी इस बीमारी का फायदा नहीं उठा ले. वैसे मदद मांगने में शर्म की कोई बात नहीं होती.

खान-पान पर दें ध्यान- डिप्रेशन होने पर सबसे पहले मरीज खाने का त्याग करता है लेकिन उन्हें और अच्छे से खाना-पीना चाहिए. हमेशा मनपसंद चीजें खाएं और संतुलित आहार लें जिससे आपकी बॉडी में खाने की एनर्जी जाती रहे और आप बॉडी से कमजोर महसूस नहीं करें.

व्यायाम और योगा- किसी भी बीमारी का हल व्यायाम और योगा है. कई वैज्ञानिक शोध में ये बात प्रमाणित हुई है कि व्यायाम से अवसाद दूर होता है और जब हम व्यायाम करते हैं तब सेरोटोनिन और टेस्टोस्टेरोन जैसे हार्मोंस रिलीज होते हैं जो दिमाग को स्थिर कर देते हैं. डिप्रेशन को बढ़ाने वाले विचार आने कम होने लगते हैं. व्यायाम और योगा आपके मन को स्थिर रखकर सेहतमंद और शारीरिक ऊर्जा प्रदान कर सकते हैं.

अपने अंदर के लेखक को जगाएं- डिप्रेशन के दौरान आपको लिखना चाहिए. अपनी दिल की सारी भड़ास कंप्यूटर के नोट पैड या फिर किसी लैटर पैड पर निकाल दीजिए. लिखने से स्ट्रेस कम होता है और इससे आत्मनिरीक्षण और विश्वेषण करने में मदद मिल जाती है. डायरी लिखने से लोग चमत्कारी ढंग से डिप्रेशन से बाहर आते हैं. इन दिनों ब्लॉग्स के ऑप्शन हैं और आप फेसबुक पर भी अपने विचार शेयर कर सकते हैं.

नकारात्मक लोगों से बनाएं दूरी- अच्चे और आपके मूड को ठीक रखने वाले दोस्तों के साथ रहना अच्छा होता है. मगर जो आपको और भी नकारात्मकता की ओर ढकेले उनसे दूरी बना लेना बेहतर होगा. डिप्रेशन के दौरान अगर आपको कोई हमारे मनोभावों को समझे या धैर्य से सुने तो हमें अच्छा लगने लगता है. दोस्तों से जुड़ने और उनके साथ समय बिताएं लेकिन जो दोस्त आपको परेशानी दे रहे हैं उनसे दूर रहना आपकी इस बीमारी को ठीक करने में मदद करेगा.




Lucky
18 जून 2019

What an idea Sneha ji, ये आर्टिकल पढ़ कर बहुत अच्छा लगा और हमें काफी मदद भी मिली है इससे........ |

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