अगर आप हैं परेशान तो करें इस प्रभावशाली सलाह से मिर्गी का इलाज

01 जुलाई 2019   |  डॉ. सौरभ श्रीवास्तव   (19 बार पढ़ा जा चुका है)

mirgi ka ilaj

पहले कुछ सालों मिर्गी को लेकर लोग काफी जागरूक हुए हैं। इसका इलाज थोड़ा लंबा है लेकिन यह कहना गलत होगा कि इसका कोई इलाज नहीं है। इस पर भी काबू पाया जा सकता है, जो कि मेडिकल साइंस द्वारा संभव है। हालांकि कुछ घरेलु उपाय भी हैं। एपिलेप्सी को हिंदी में (epilepsy meaning in hindi) मिर्गी कहते हैं।

समय पर इलाज तो जल्दी मिलेगा छुटकारा

आपको बता दें कि मिर्गी दो प्रकार की होती है- दीमाग के किसी एक हिस्से में और दिमाग के पूरे हिस्से में। सामान्यीकृत दौरे में पूरा मस्तिष्क शामिल होता है। 20 से 30 प्रतिशत मिर्गी के मरीजों को जिंदगी भर इसकी दवा epilepsy medicine करनी पड़ती है और लगभग 10 से 20 प्रतिशत मरीजों को इसके इलाज के लिए ऑपरेशन करवाना पड़ता है। इस बीमारी से जुड़ी गलत जानकारियों पर ध्यान न देकर mirgi treatment के लिए हमारे विशेषज्ञ डॉक्टरों से संपर्क करें।


मिर्गी के मुख्य लक्षण

1.बात करते हुए दिमाग का ब्लैंक हो जाना

2.मांसपेशियों का अचानक फड़कना

3.तेज रोशनी से परेशान होना

4.अचानक से गिर जाना और कांपना


कुछ प्रमुख कारण

1.सिर पर चोट लगना

2.दिमागी बुखार होना

3.दिमाग में कीड़े की गांठ

4.शराब या नशीली दवाओं का ज्यादा सेवन

5.मस्तिष्क को ऑक्सीजन की कमी होना

6.ब्रेन ट्यूमर

7.एड्स जैसे संक्रमित बिमारियों के संपर्क में आना

मिर्गी किसी भी आयु में उत्पन्न हो सकती है। आनुवंशिकता कुछ प्रकार की मिर्गी में की मिर्गी का कारण बनती है। लगभग सामान्य आबादी में, 20 वर्ष की आयु से पहले मिर्गी विकसित होने की 1% संभावना होती है। यदि आपके माता-पिता में से किसी को भी इस बीमारी से शिकायत थी तो इसकी संभावना आपके अंदर 2 से 5 प्रतिशत तक बढ़ जाती है।


मिर्गी का आयुर्वेदिक उपचार- epilepsy ayurvedic treatment

1.बड़ी इलायची, अमरूद, बादाम, और अमार के करीब 20 पत्ते पीसकर दो गिलास पानी में उबालें और पानी जब जलकर आघा हो जाये तो इसमें नमक मिलाकर रोगी को दिन में दो बार पिलायें। ऐसा करने से कुछ ही दिनों में मिर्गी के समाप्त होने की संभावना बढ़ जाती है।

2.करीब आधा किलो अंगूर का रस सुबह खाली पेट पीने से काफी अच्छा प्रभाव दिखाई देगा।

3.नमक के पानी से नहाने पर बार-बार दोरे आने में कमी दिखाई देगी।

4.विटामिन बी-6 का सेवन भी काफी हद तक इस रोग से निजात पाने में मदद करता है। जैसे कि विटामिन B6 गाजर, मूम्फ़ली, चावल, हरी सब्जियों और दालों में सबसे अघिक पाया जाता है।

5.रिसर्च के अनुसार मिर्गी के रोगी को ज्यादा फैट वाला और कम कार्बोहाइड्रेड वाला भोजन खाना चाहिए और इलाज के दौरान आपको ज्यादा मानसिक तनाव में नहीं रहना चाहिए और डॉक्टर द्वारा दिए गए सलाह का सही तरह से सेवन करना चाहिए और नियमति रूप से संतुलित भोजन करना चाहिए।


मिर्गी का देसी इलाज

1.तुलसी में अधिक मात्रा में एंटी ऑक्सीडेंट पाये जाते हैं जो दिमाग के फ्री रेडिकल्स को ठीक करते हैं। इसलिए रोजाना 20 तुलसी के पत्ते खायें। दौरा पड़ने पर तुलसी का रस और सेंधा नमक मिलाकर मरीज के नाक में डालें। तुलसी के पत्ते की जगह सीताफल के पत्ते का रस लें सकते हैं।

2.करौंदा की चटनी खिलाएं।

3.रोजाना एक चम्मच सफेद प्याज का रस पिलाएं।

4.गोज सुबह शहतूत व अंगूर का रस पियें।

5.पेठा या कद्दू का सेवन करें क्योंकि इसके पोषक तत्वों से दिमाग के नाडी रसायन संतुलित होते हैं और अगर टेस्ट अच्छा न लगे तो चीनी ऐर मुलहटी का पाउडर मिलाकर रोगी को पिलाएं।

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डॉ.स्नेहा दुबे
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