बिना सर्जरी के रीढ़ की हड्डी का करें इलाज, जानिए इसके कारण और लक्षण

06 जुलाई 2019   |  डॉ.स्नेहा दुबे   (21 बार पढ़ा जा चुका है)

जिस तरह एक पूरी फिल्म की जिम्मेदारी एक दमदार एक्टर के कंधों पर होती है वैसे ही एक शरीर को खड़ा करने में रीढ़ की हड्डी बहुत जरूरी होती है। इसके बिना हमारा उठना-बैठना, खड़े होना या ठीक से बैठ पाना सब मुश्किल हो जाता है। रीढ़ की हड्डी हमारे शरीर का आधार होती है जो हमारे तंत्रिका का सपोर्ट सिस्टम कहलाता है। वो आधार जिसके बल पर हम सबका शरीर खड़ा हो पाता है और जरा सोचिए कि जिस इंसान की रीढ़ की हड्डी ही डैमेज हो जाए तो भयंकर दर्द के साथ उनका चलना-फिरना दुश्वार हो जाता है। rid ki haddi ka ilaj एलोपैथिक और आयुर्वेद दोनों में इलाज है।


रीड़ की हड्डी

यूके और स्वीडन के वैज्ञानिकों ने रीढ़ की हड्डी में न्यूरॉन्स को फिर से जोड़ने के लिए एक नई सर्जिकल तकनीक का विकास किया गया है और इन वैज्ञानिकों ने रीढ़ की हड्डी में दर्दनाक चोट का इलाज निकाला है। इन वैज्ञानिकों ने इस तकनीक को सेलुलर स्तर पर करने के बाद विकसित किया है। भले ही रीढ़ की हड्डी मानव शरीर के लिए बहुत फायदेमंद हो और इसका इलाज एलोपैथिक से हो लेकिन आयुर्वेद में भी इसके समाधान ढूंढ लिए गए हैं। रीढ़ की हड्डी को ठीक करने से पहले उसमें क्या समस्या है और उसका क्या कारण है इसके बारे में जरुर जान लेना चाहिए।


रीढ़ की हड्डी में समस्या के कारण


आपने अक्सर देखा होगा जरा सी रीढ़ की हड्डी में समस्या होने के कारण व्यक्ति का हिलना-डुलना बिल्कुल बंद हो जाता है, ऐसे में अगर वह हड्डी स्थायी तौर पर काम करना बंद कर जाए तो इंसान को बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। आमतौर पर रीढ़ की हड्डी में समस्या के कुछ ऐसे कारण होते हैं-

1. झुककर या लेटकर पढ़ना-लिखना या काम करना,

2. कंप्‍यूटर के आगे ज़्यादा झुककर बैठे रहना,

3. ग़लत उठने-बैठने के कारण

4. ज़्यादा देर आराम करना और पैदल ना चलना,

5. व्‍यायाम ना करना,

6. ज्यादा शारीरिक श्रम करना,

7. गिरने, फिसलने, चोट लगने व देर तक गाड़ी चलाने से भी यह समस्‍या हो सकती है

8. लंबे समय तक बैठने से रीढ़ की हड्डी के जोड़ खराब होते हैं और आगे चलकर पीठ दर्द और गर्दन दर्द का कारण बन जाता है।

9. एसी स्थिति में लंबे समय तक बैठने से हमारी मांसपेशियां क्रियाशील नहीं करती है और इस कारण से हमारे दिमाग को ताजा खून और ऑक्सीजन नहीं मिल पाता है।

10. एक ही स्थिति में लंबे समय तक बैठने से खराब कोलेस्ट्रॉल के स्तर में वृद्दि होती है और साध ही की तह के कैंसर और अन्य बीमारियां भी हो जाती हैं।


रीढ़ की हड्डी से जुड़ी बीमारी के लक्षण


रीढ़ की हड्डी में जब कोई समस्या आने लगती है उसे स्लीप डेस्क कहते हैं और इसके लिए बहुत सी सावधानियां बरतनी पड़ती है। जब भी व्यक्ति को इन समस्याओं का सामना करना पड़ता है तो मान लीजिए उन्हें स्लीप डिस्क की समस्या हो गई है-

1. स्लीप डिस्क की समस्या में कमर दर्द एक प्रमुख लक्षण होता है और यह दर्द कमर से लेकर पैरों तक जाता है।

2. दर्द के साथ ही साथ पैरों में सुन्नपन महसूस होने लगता है और पैर भारी से हो जाते हैं।

3. कई बार लेटे-लेटे भी कमर से पैर तक भयंकर दर्द का एहसास होने लगता है।

4. नसों में एक अजीब प्रकार का खिंचाव व झनझनाहट होना स्लीप डिस्क का एक दूसरा लक्षण माना जाता है। इस झनझनाहट की वजह से पूरी नसों में दर्द होता है।

5. डिस्क वाली जगह पर सूजन होना।


रीड़ की हड्डी


रीढ़ की हड्डी से दर्द से बचाव


1. शरीर का वजन सही बनाए रखने से हम बहुत सारी परेशानियों से बच सकते हैं। इससे आपकी पीठ के निचले हिस्से पर दबाव कम होता है और नियमित रूप से एक्सरसाइज करें।

2. अगर आप धूम्रपान करते हैं तो इसे छोड़ दें, निकोटिन आपकी पीठ में डिस्क को नुकसान पहुंचाता है। यह पोषक तत्वों को अवशोषित करने की क्षमता को कम कर देता है और इससे डिस्क सूख जाती है।

3. वजन उठाने के लिए सही तकनीक का उपयोग करें, खाली झुकने या टेढ़े बैठने से ही पीठ का दर्द नहीं होता है लेकिन अगर पीठ में चोट लगी है तो गलत तरीके से सोना या बिल्कुल भी बैठना नहीं चाहिए।

4. खड़े होने या चलने के दौरान अपने कान, कंधों और कूल्हे पर सीधी रेखा में बचें। बैठने पर अपनी पीठ को सुरक्षित रखें आप कोई लंबे समय तर बैठने का काम करते हैं जो आपको अपनी पीठ और कुर्सी के बीच एक छोटा तकिया या तौलिया रख सकते हैं।

5. सोते समय अपनी पीठ को सही स्थिति में रख सकते हैं।


रीढ़ की हड्डी का इलाज


स्लिप्ड डिस्क का इलाज के लिए कुछ लोगों को तो सर्जरी की जरूरत पड़ती है, क्योंकि ये उस स्टेज तक पहुंच जाती है कि फिर बिना सर्जरी के इसे ठीक नहीं किया जा सकता है। इसके अलावा कई बार व्यायाम या दवाएं भी इस रोग में मददगार होता है। समय रहते अगर आप इसका इलाज करा लेना चाहिए क्योंकि उस समय आप व्यायाम और दवाईयों से ठीक हो जाते हैं लेकिन अगर समय रहते इसका इलाज नहीं होता तो बहुत परेशानियां होती हैं। रीढ़ की हड्डी का इलाज आयुर्वेद में भी है लेकिन अगर समस्या ज्यादा है तो एक बार अपने फैमिली डॉक्टर्स से सलाह लेकर ऐलोपैथिक इलाज कराएं।


निष्कर्ष- रीड़ की हड्डी की बीमारी बहुत घातक होती है और ऐसे में अगर आप लापरवाही बरतते हैं तो ये समस्या बड़ी होती है। अगर आपको इस विषय में हमारे एक्सपर्ट्स से सलाह लेनी है तो उनसे जरूर बात करें। इस विषय में आपकी हर संभव मदद की जाएगी।

रीड़ की हड्डी



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