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लोक जीवन में तीज-त्यौहार

कविता रावत

8 अध्याय
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हमारी भारतीय संस्कृति में विभिन्न धर्म,  जाति,  रीति,  पद्धति,  बोली, पहनावा, रहन-सहन वाले लोगों के अपने-अपने उत्सव, पर्व, त्यौहार हैं,  जिन्हें वर्ष भर धूमधाम से मिलजुलकर मनाये जाने की सुदीर्घ परम्परा है। ये उत्सव, त्यौहार, पर्वादि हमारी भारतीय संस्कृति की अनेकता में एकता की अनूठी पहचान कराते हैं। रथ यात्राएं हो या ताजिए या फिर किसी महापुरुष की जयन्ती, मन्दिर-दर्शन हो या कुंभ-अर्द्धकुम्भ या स्थानीय मेला या फिर कोई तीज-त्यौहार जैसे- रक्षाबंधन, होली, दीवाली, जन्माष्टमी, गणेश चतुर्थी, शिवरात्रि, क्रिसमस या फिर ईद जनमानस अपनी जिन्दगी की भागदौड़, दुःख-दर्द, भूख-प्यास सबकुछ भूलकर मिलजुल के उल्लास, उमंग-तरंग में डूबकर तरोताजा हो उठता है। इन सभी पर्व, उत्सव, तीज-त्यौहार, या फिर मेले आदि को जब जनसाधारण जाति-धर्म, सम्प्रदाय से ऊपर उठकर मिलजुलकर बड़े धूमधाम से मनाता है तो उनके लिए हर दिन उत्सव का दिन बन जाता है। इन्हीं पर्वोत्सवों की सुदीर्घ परम्परा को देख हमारी भारतीय संस्कृति पर "आठ वार और नौ त्यौहार" वाली उक्ति चरितार्थ होती है। आइए इन्हीं लोक जीवन के तीज त्यौहारों के रंग में रंगने के लिए आप भी धीरे-धीरे मेरे साथ-साथ चलते हुए थके हारे मन को तरोताजा कीजिए। 

lok jivan men tej tyauhar

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Shandar👌👌👌 Bahut hi accha or lajawab tarike se tyoharon ke rang me sajaya gya har bhag behtareen hai

पुस्तक के भाग

1

मकर संक्रांति

19 जनवरी 2022
10
7
3

हमारे भारतवर्ष में मकर संक्रांति, पोंगल, माघी उत्तरायण आदि नामों से भी जाना जाता है। वस्तुतः यह त्यौहार सूर्यदेव की आराधना का ही एक भाग है। यूनान व रोम जैसी अन्य प्राचीन सभ्यताओं में भी सूर्य और उ

2

प्रकृति के आनन्द का अतिरेक है वसंत

5 फरवरी 2022
6
2
0

          व्रत ग्रंथों और पुराणों में असंख्य उत्सवों का उल्लेख मिलता है। ‘उत्सव’ का अभिप्राय है आनन्द का अतिरेक। ’उत्सव’ शब्द का प्रयोग साधारणतः त्यौहार के लिए किया जाता है। उत्सव में आनन्द का सामू

3

होली कथा में ढूंढा राक्षसी

17 मार्च 2022
4
3
0

होली पर्व से सम्बन्धित अनेक कहानियों में से हिरण्यकशिपु के पुत्र प्रहलाद की कहानी बहुत प्रसिद्ध है। इसके अलावा ढूंढा नामक राक्षसी की कहानी का वर्णन भी मिलता है, जो बड़ी रोचक है।  कहते हैं कि सतयुग में

4

श्रीकृष्ण से जुड़े प्रेरक प्रसंग

19 अगस्त 2022
19
13
2

मान्यता है कि त्रेता युग में 'मधु' नामक दैत्य ने यमुना के दक्षिण किनारे पर एक शहर ‘मधुपुरी‘ बसाया। यह मधुपुरी द्वापर युग में शूरसेन देश की राजधानी थी। जहाँ अन्धक, वृष्णि, यादव तथा भोज आदि सात वं

5

क्यों सर्वोपरि माना जाता है गया में श्राद्ध व पिंडदान करना?

16 सितम्बर 2022
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6

इन दिनों आश्विन कृष्णपक्ष प्रतिपदा से दुर्गा पूजा की पहली पूजा तक समाप्त होने वाले पितृपक्ष यानि पितरों (पूर्वजों) का पखवारा चल रहा है। मरने के बाद हम हमारे पूर्वजों के प्रति श्रद्धा स्वरूप श्राद्

6

नवरात्रि महोत्सव

27 सितम्बर 2022
7
5
2

जब प्रकृति हरी-भरी चुनरी ओढ़े द्वार खड़ी हो, वृक्षों, लताओं, वल्लरियों, पुष्पों एवं मंजरियों की आभा दीप्त हो रही हो, शीतल मंद सुगन्धित बयार बह रही हो, गली-मोहल्ले और चौराहे  माँ की जय-जयकारों के

7

दशहरा (विजयादशमी)

5 अक्टूबर 2022
12
10
2

मुझे बचपन से ही रामलीला देखने का बड़ा शौक रहा है। आज भी आस-पास जहाँ भी रामलीला का मंचन होता है तो उसे देखने जरूर पहुंचती हूँ। बचपन में तो केवल एक स्वस्थ मनोरंजन के अलावा मन में बहुत कुछ समझ में आता

8

पंच दिवसीय दीपोत्सव

23 अक्टूबर 2022
23
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कार्तिक मास के कृष्णपक्ष की त्रयोदशी को पंच दिवसीय दीपोत्सव का आरम्भ भगवान धन्वन्तरी की पूजा-अर्चना के साथ शुरू होकर भाई दूज तक मनाया जाता है, जो सुख, समृद्धि का खुशियों भरा दीपपर्व ’तमसो मा ज्योतिर

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